Tuesday, May 26, 2015

Hanuman Ashtak - संकटमोचन हनुमानाष्टक

संकटमोचन हनुमान !! Jai Shri Ram

बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों I 
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात  न टारो I 
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I 
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो I को - १

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो I 
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो I 
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो I  को - २

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो I 
जीवत ना बचिहौ हम सो  जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I 
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I  को - ३

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो I 
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो I 
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I  को - ४ 

बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो I 
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I 
आनि सजीवन हाथ  दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो I को - ५ 

रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो I 
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो I 
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो I  को - ६

बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो I 
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I 
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो I को - ७ 

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो I 
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो I 
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो I  को - ८ 

दोहा 
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर I 
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर II 

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